बहना चाहता हूं,,,,,,,,,,,,,,
मौत से पहले
जिंदगी को महसूस
करना चाहता हूं
रहूं ना रहूं
मैं-
विचार बनकर
धमनियों में बहना
चाहता हूं।
सूख गए
होठों पर
पानी की बूंद बन
बरसना चाहता हूं
अंधेरी, पथराई आंखों से
आंसू बनकर
बहना चाहता हूं।
आंत की चुभन को
कुंद-
करना चाहता हूं
पलकों के पीछे की
निराशाओं
के बीच
उनमें आशा बनकर
सोना चाहता हूं
धूप की तपिश के
बाद
मंद बयार बनकर
बहना चाहता हूं।
हर जिंदगी का
आखिर
मौत होती है
उस मौत के बाद
इक इंसान बन
पैदा होना चाहता हूं ।
मौत से पहले
जिंदगी को महसूस
करना चाहता हूं
रहूं ना रहूं
मैं-
विचार बनकर
हर किसी की
धमनियों में बहना चाहता हूं।
सूखी छातियों के
दरमियां
नम सांस बन
चलना चाहता हूं
हर किसी के
साथ
दो पल का
अहसास बन
जीना चाहता हूं।
मंद पड़े दिलों में
धड़कनों की रफ़तार
बनना चाहता हूं।
मौला से अपनी
गुजारिश की दुनिया
मांगना चाहता हूं
रहूं ना रहूं मैं,,,,,,,,,,,,,,,
पंख
लेबल: गुजारिश की दुनिया

