जागो फिर एक बार
जागो फिर एक
बार देखो क्या कह रही है
ये वक्त की बयार
आओ
मेरा सीना चीर के
भरो
एक नई हुंकार
जागो फिर एक बार
कितना भी ये
दुनियावी सर्प
फुंफकारे बार-बार
कुचल के रख दो
इसके फण को
कर दो इसके
विष को तार तार
जागो फिर एक बार।
आंखों की कोठरियां
पसलियों की टोकरियां
पेटों की अंतडि़यां
बंजरे-जमीन की बेवाइयां
पुकारती हैं बार- बार
जागो फिर एक बार
तो क्यूं हंसते हो
क्यूं शर्माते हो
क्यूं चेहरा छिपाते हो
क्यूं कोसते हो
उनको हर बार
दिखा दो कि
तुम आ गए हो
मेरे यार जागो
फिर एक बार।।
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