शुक्रवार, 20 जून 2008

जागो फिर एक बार

जागो फिर एक
बार देखो क्‍या कह रही है
ये वक्‍त की बयार
आओ
मेरा सीना चीर के
भरो
एक नई हुंकार
जागो फिर एक बार
कितना भी ये
दुनियावी सर्प
फुंफकारे बार-बार
कुचल के रख दो
इसके फण को
कर दो इसके
विष को तार तार
जागो फिर एक बार।
आंखों की कोठरियां
पसलियों की टोकरियां
पेटों की अंतडि़यां
बंजरे-जमीन की बेवाइयां
पुकारती हैं बार- बार
जागो फिर एक बार
तो क्‍यूं हंसते हो
क्‍यूं शर्माते हो
क्‍यूं चेहरा छिपाते हो
क्‍यूं कोसते हो
उनको हर बार
दिखा दो कि
तुम आ गए हो
मेरे यार जागो
फिर एक बार।।

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