जाने कब,,,,,,
जाने कब
किस घड़ी
जिंदगी की
शाम हो जाए
आखिरी आरजू है
बस यही
कि-
तेरे आगोश में
सांसों को
ऐहतराम मिल जाय
ऐ! खुदा
मेरी रूह को
तेरी बाहों में
पनाह मिल जाय।।
'पंख'
लेबल: रूह
जाने कब
किस घड़ी
जिंदगी की
शाम हो जाए
आखिरी आरजू है
बस यही
कि-
तेरे आगोश में
सांसों को
ऐहतराम मिल जाय
ऐ! खुदा
मेरी रूह को
तेरी बाहों में
पनाह मिल जाय।।
'पंख'
लेबल: रूह
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