न था कुछ,
तो खुदा था
कुछ
न होता
तो
खुदा होता
डुबोया मुझको
होने ने
मैं
क्या होता,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
गालिब
प्रस्तुतकर्ता Samyak @ 1:07 am 0 टिप्पणियाँ
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