रविवार, 26 जुलाई 2009

मेरे पंख,,,,,,,,,

मेरे पंख अब
उड़ने लगे हैं
सपनों की
हकीकत अब पहचानने
लगे हैं
देखकर दुनिया की रंगत
अब वो भी
अपनी रंगत
बदलने लगे हैं
जो हो रहा है
इधर उधर
उसको भी महसूस
करने लगे हैं
मेरे पंख अब
उड़ने लगे हैं.
आज मुद्दतों बाद
ये जहरीली हवा में
फिर से साँस लेने लगे हैं
सपनों को
हकीकत से मिलाकर
अब ये नए सपने
बुनने लगे हैं
दुनिया के
नुकीले जबड़ों से बचकर
ये पैरों पर भी
चलना सीखने लगे हैं
मेरे पंख अब उड़ने लगे हैं.

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